
खेतासराय। धान कुटाई में प्रोत्साहन राशि समाप्त किए जाने और ब्रोकन चावल उतारने के मानक में कटौती से राइस मिलर्स की मुश्किलें बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश राइस मिलर्स एसोसिएशन ने इन फैसलों पर आपत्ति जताते हुए सरकार से पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग की है। एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष प्रवेश कुमार ने सोमवार को मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजकर समस्याओं के समाधान की मांग उठाई है।
मांगें पूरी नहीं होने पर उन्होंने सामूहिक हड़ताल और धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है।एसोसिएशन ने दिए गए ज्ञापन में बताया कि पिछले वर्षों में धान की कुटाई के बाद 15 से 25 दिनों के भीतर चावल जमा कराने पर 25 और 35 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रोत्साहन राशि दी जाती थी। इससे मिलर्स को कुटाई के दौरान होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई में मदद मिलती थी।
अपर परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश के आदेश को वाराणसी मंडल के अधिकारियों द्वारा दिखाया जा रहा ठेंगा।चालू सत्र में यह राशि समाप्त किए जाने से मिलों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है।जिलाध्यक्ष प्रवेश कुमार ने कहा कि प्रोत्साहन राशि बंद होने और ब्रोकन चावल की मात्रा में कटौती से राइस मिलों का संचालन प्रभावित होगा। इसका असर उद्योग से जुड़े लोगों की आजीविका पर भी पड़ सकता है।
सरकार को मिलर्स की समस्याओं पर गंभीरता से विचार कर राहत देनी चाहिए।एसोसिएशन ने मांग की है कि सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) जमा करने के दौरान पहले की तरह 25 प्रतिशत ब्रोकन चावल स्वीकार किया जाए। साथ ही 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रोत्साहन राशि बहाल की जाए। संगठन ने आशंका जताई है कि इन फैसलों से करीब तीन लाख लोगों के रोजगार पर संकट उत्पन्न हो सकता है। मांगों पर सुनवाई नही होने पर मिलर्स आंदोलन करेंगे।














