
जौनपुर शाहगंज कोतवाली क्षेत्र के सुरिस गांव निवासी आठ वर्षीय बच्ची सानिया गंभीर बीमारी से जूझते हुए जिंदगी और मौत के बीच पहुंच गई। कई चिकित्सकों से उपचार के बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ तो परिजनों की उम्मीद टूटने लगी।
आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि बच्ची को वाराणसी ले जाकर इलाज करा सकें। ऐसे मुश्किल समय में विद्या चाइल्ड केयर हॉस्पिटल के नवजात एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. देवी प्रसाद पुष्पजीवी ने बच्ची का उपचार शुरू किया। करीब 20 दिनों के उपचार के बाद बच्ची स्वस्थ होकर घर लौटने की स्थिति में पहुंच गई।जानकारी के अनुसार, सुरिस निवासी सेराज उर्फ बबलू जो नाई का काम करता था।
की आठ वर्षीय पुत्री सानिया की करीब 20 दिन पूर्व अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने कई चिकित्सकों से उपचार कराया, लेकिन बच्ची की हालत लगातार गंभीर बनी रही। इसके बाद किसी परिचित की सलाह पर परिजन उसे शाहगंज स्थित नवजात एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. देवी प्रसाद पुष्पजीवी के पास लेकर पहुंचे।जांच के दौरान बच्ची का प्लेटलेट्स काउंट करीब 60 हजार पाया गया। उसे खून की उल्टी और मल में भी खून आने की शिकायत थी। उसकी हालत गंभीर देखते हुए चिकित्सक ने परिजनों को बेहतर उपचार के लिए वाराणसी ले जाने की सलाह दी। हालांकि, आर्थिक तंगी के कारण परिजन बच्ची को वाराणसी ले जाने में असमर्थ थे।
उन्होंने चिकित्सक से स्थानीय स्तर पर ही उपचार करने का आग्रह किया।इसके बाद डॉ. पुष्पजीवी ने बच्ची का उपचार शुरू किया। अस्पताल के चिकित्सकों और स्टाफ की निगरानी में करीब 20 दिनों तक लगातार जांच और उपचार चलता रहा। उपचार का असर धीरे-धीरे दिखाई देने लगा और बच्ची की हालत में लगातार सुधार हुआ। लगभग 20 दिन बाद उसकी स्थिति सामान्य हो गई।इनसेट में*पिता बोले—उम्मीद छोड़ चुके थे*बच्ची के पिता सेराज उर्फ बबलू ने बताया कि एक समय ऐसा आ गया था जब उन्हें बेटी के बचने की उम्मीद नहीं रही थी। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में डॉ. पुष्पजीवी ने मदद का हाथ बढ़ाया और उनकी बेटी को नया जीवन मिला। पिता के मुताबिक, चिकित्सक ने उपचार का खर्च भी नहीं लिया।इनसेट में*लेप्टोस्पायरोसिस से पीड़ित थी बच्ची*डॉ. देवी प्रसाद पुष्पजीवी ने बताया कि बच्ची बेहद गंभीर हालत में उनके पास आई थी। उसे खून की उल्टी, मल में खून आने के साथ प्लेटलेट्स काफी कम हो गए थे। जांच के आधार पर बच्ची में लेप्टोस्पायरोसिस (Leptospirosis) की पुष्टि हुई।उन्होंने बताया कि लेप्टोस्पायरोसिस Leptospira नामक बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है। संक्रमित जानवरों, विशेषकर चूहों के मूत्र से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से इसका संक्रमण हो सकता है। बारिश और खेतों में जमा दूषित पानी के संपर्क में आने पर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। गंभीर स्थिति में यह बीमारी शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकती है और जानलेवा भी साबित हो सकती है।डॉ. देवी प्रसाद पुष्पजीवी नवजात एवं बाल रोग विशेषज्ञ

















