
नेपाल की भीषण बाढ़ पर पूर्व आईएएस डॉ. दिनेश चन्द्र ने जताई गहरी संवेदना, कहा—संकट की घड़ी में पूरा भारत नेपाल के साथ
रिपोर्टर दीपक शुक्ला
भारत-नेपाल के रोटी-बेटी के संबंधों को बताया आत्मीय और अटूट, त्रिदेव से नेपालवासियों को शक्ति मिलने की कामनानेपाल में बाढ़ से प्रभावित राकेश टिकैत और उनकी टीम की सेवा करने वाले लक्ष्मण जी तथा सिद्धनाथ पीठ के महामंडलेश्वर रविगिरि जी महाराज को किया नमन भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में ब्रह्मा, विष्णु और महेश को त्रिदेव एवं त्रिमूर्ति के रूप में श्रद्धा के साथ नमन किया जाता है।
सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा, पालनकर्ता भगवान विष्णु और परिवर्तन एवं संहार के देवता भगवान शिव सनातन परंपरा में विशेष आस्था के केंद्र हैं। इसी आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक भावभूमि को रेखांकित करते हुए पूर्व आईएएस डॉ. दिनेश चन्द्र ने नेपाल में आई भीषण बाढ़ पर गहरी संवेदना व्यक्त की है।डॉ. दिनेश चंद्र ने कहा कि सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति प्रकृति के विविध रूपों को स्वीकार करने की सीख देती है।
भौगोलिक परिस्थितियों के कारण नेपाल में समय-समय पर भूकंप, बाढ़, भू-स्खलन सहित विभिन्न प्राकृतिक आपदाएं आती रही हैं, लेकिन वहां के लोगों ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं से कभी पलायन नहीं किया। उन्होंने नेपालवासियों की इस आस्था और धैर्य को नमन किया।आदरणीय श्री राकेश टिकैत जी उस परंपरा के अनुयायी हैं, जो महात्मा टिकैत जी के पुत्र हैं, जिन्होंने कृषकों की लड़ाई को लड़ा और कृषकों के हित के लिए सदैव प्रयास करते हुए पूरे उत्तर प्रदेश ही नहीं, पूरे देश, विदेश और विश्व में कृषकों की लड़ाई के मसीहा बने।
यह राकेश टिकैत जी उन्हीं के पुत्र हैं और आज भी वह उस परंपरा को आगे निर्वहन कर रहे हैं। इसीलिए मुझे जब सूचना मिली कि वह नेपाल में हैं, तो मैंने यह छोटा सा प्रयास किया। उन्होंने कहा कि नेपाल भारत का मित्र राष्ट्र है और दोनों देशों के संबंध केवल राजनीतिक या भौगोलिक नहीं, बल्कि सदियों पुरानी सांस्कृतिक आत्मीयता पर आधारित हैं। भारत और नेपाल के बीच ‘रोटी-बेटी’ के संबंध हैं। दोनों देशों के परिवारों में वैवाहिक एवं सामाजिक रिश्ते हैं और यही कारण है कि दोनों देशों के नागरिक एक-दूसरे के सुख-दुख में स्वाभाविक रूप से सहभागी बनते हैं। पूर्व जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र जी के संबंधित नेपाल राष्ट्र के प्रतिष्ठित उद्यमी और व्यापारी ने राकेश टिकैत जी और उनका पूरा सम्मान और आदर के साथ उनका आदर किया, सम्मान किया और इस दुःख की घड़ी में भी अतिथि देवो भवः का परिचय देते हुए उनके साथ संबद्ध रहे और उनका समर्थन किया।

















