
जौनपुर केराकत बदलती जीवनशैली और लगातार कम होते पेड़-पौधों के बीच गौरैया के घोंसले अब पहले की अपेक्षा कम ही दिखाई देते हैं। ऐसे में केराकत क्षेत्र के तरियारी गांव निवासी किसान रमाशंकर यादव के खेत में लगे मशीन पाही पर अमरूद के लगे दो पेड़ों पर एक साथ कई गौरैया के घोंसले नजर आने से लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ।
पेड़ की डालियों से लटकते घोंसलों ने ग्रामीण परिवेश और बचपन के उन दिनों की यादें ताजा कर दीं, जब घरों के आंगन, खपरैल और पेड़ों पर गौरैया की चहचहाहट आम हुआ करती थी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले सुबह होते ही गौरैया की आवाज से घर-आंगन गूंज उठते थे। पेड़ों की डालियों पर उनके घोंसले आसानी से दिखाई देते थे, लेकिन अब पेड़ों की संख्या घटने और बदलते पर्यावरण के कारण गौरैया का बसेरा भी कम होता जा रहा है। अमरूद के पेड़ पर बने ये घोंसले प्रकृति के साथ पक्षियों के मधुर रिश्ते की सुंदर तस्वीर पेश कर रहे हैं।
लोगों ने कहा कि पक्षियों के संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाने चाहिए और उनके लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया जाना चाहिए। अमरूद के पेड़ पर लगे घोंसले पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पुरानी ग्रामीण जीवनशैली की सुखद यादों को भी जीवंत कर रहे हैं।

















