
जौनपुर। कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन द्वारा प्रस्तावित मनमाने एवं असंवैधानिक आयु सीमा संशोधन के विरोध में कलेक्ट्रेट परिसर में युवा अधिवक्ताओं का शांतिपूर्ण एवं अनुशासित धरना आज भी पूर्ण विधिक प्रतिबद्धता के साथ जारी रहा।
धरनारत अधिवक्ताओं ने बार के मूल उपनियमों (बाय-लॉज) की विधिक संप्रभुता को अक्षुण्ण रखने तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के संरक्षण हेतु अपना संवैधानिक प्रतिरोध निरंतर बनाए रखा।धरने के दौरान अधिवक्ताओं ने बार एसोसिएशन के शीर्ष नेतृत्व की स्वेच्छाचारिता पर गंभीर विधिक आपत्ति दर्ज कराई।
वक्ताओं ने मामले को रेखांकित करते हुए कहा कि 439 नियमित सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित विधिसम्मत अधियाचन (Requisition) सौंपे जाने के बावजूद विहित समयावधि में साधारण सभा (आम सभा) आहूत न करना लोकतांत्रिक परंपराओं तथा विधिक शुचिता का खुला उल्लंघन है। उन्होंने आरोप लगाया कि बहुमत के संप्रभु अधिकारों को अनसुना कर एकतरफा आदेश थोपना पूर्णतः अधिकार-विहीन (Ultra Vires) एवं अमान्य कृत्य है।
सभा को संबोधित करते हुए वरिष्ठ एवं युवा अधिवक्ताओं ने अपना संकल्प दोहराते हुए स्पष्ट किया कि जब तक वर्तमान पंजीकृत उपनियमों की विधिक मर्यादा बहाल नहीं होती और प्रस्तावित त्रुटिपूर्ण संशोधन प्रस्ताव को औपचारिक रूप से निरस्त नहीं किया जाता, तब तक यह लोकतांत्रिक व विधिक सत्याग्रह पूर्ण अनुशासन के साथ अनवरत जारी रहेगा

















