
जौनपुर में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का फूटा गुस्सा, PLI को वेतन में शामिल करने और पूर्ण मानदेय की मांग को लेकर किया जोरदार प्रदर्शनजौनपुर: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने अपनी मांगों को लेकर जिला मुख्यालय पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी जौनपुर को सौंपकर सरकार द्वारा घोषित मानदेय बढ़ोतरी में विसंगतियों को दूर करने और Performance Linked Incentive (PLI) को सीधे मूल वेतन में शामिल करने की मांग उठाई मुख्यमंत्री के वादों और बजट पर उठाए सवाल प्रदर्शन कारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रदेश में दोबारा सरकार बनने के बाद से ही मुख्यमंत्री द्वारा लगातार न्यूनतम वेतन और स्मार्ट वेतन देने की घोषणाएं की जा रही हैं।
इसके बावजूद, मार्च 2026 के आखिरी बजट में भी उनके मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई, जबकि पिछले साल उत्तर प्रदेश सरकार के पास ₹79,516 करोड़ का भारी-भरकम राजस्व अधिशेष (सरप्लस) मौजूद था, जिसे सरकार खर्च तक नहीं कर पाई।’अयोध्या की घोषणा एक छलावा’: कार्यकर्ताओं का आरोपआंदोलनकारी महिलाओं ने बताया कि एक लंबे इंतजार के बाद 8 सितंबर को अयोध्या में बड़ी संख्या में आंगनवाड़ी कर्मचारियों को बुलाकर मानदेय बढ़ाने का एलान किया गया था। सरकार के मुताबिक, अक्टूबर महीने से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को कुल ₹12,000 और सहायिकाओं को ₹6,000 मासिक मानदेय मिलेगापरंतु, इस घोषणा की जमीनी हकीकत बयां करते हुए कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस बढ़ोतरी में ₹2,500 और ₹1,250 की राशि केवल PLI (परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव) के मद में रखी गई है। इस तरह असल मानदेय में आंगनवाड़ी वर्कर के लिए मात्र ₹1,500 और हेल्पर के लिए सिर्फ ₹750 की ही वास्तविक वृद्धि हुई है, जो राज्य के कुशल मजदूरों (औसत ₹16,000) और अर्धकुशल मजदूरों (₹14,000) को मिलने वाली मजदूरी से बेहद कम है।
PLI के नाम पर वेतन कटौती का विरोधचौंकाने वाला तथ्य सामने रखते हुए प्रदर्शनकारियों ने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से वर्तमान में कुल वेतन का एक-तिहाई हिस्सा (कार्यकर्ताओं को ₹4,000 और सहायिकाओं को ₹2,000) केवल PLI के रूप में दिया जा रहा है। देश के किसी भी अन्य राज्य में ऐसी व्यवस्था नहीं है। अन्य राज्यों में केवल केंद्र सरकार की ओर से डिजिटल काम को बढ़ावा देने के लिए ₹500 प्रति माह का इंसेंटिव दिया जाता है।
50 सालों की सेवा, फिर भी कम परफॉर्मेंस की गुंजाइश नहींआंगनवाड़ी संघ ने सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि वे पिछले 50 वर्षों से देश के भविष्य यानी बच्चों के बुनियादी विकास और पोषण की जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से संभाल रही हैं। इस बेहद महत्वपूर्ण सेवा में ‘कम परफॉर्मेंस’ जैसी कोई गुंजाइश ही नहीं होती, फिर भी उनके एक-तिहाई वेतन को इंसेंटिव (PLI) से जोड़कर अनिश्चित बनाना उनके साथ सरासर अन्याय है

















