
संवाददाता राजकुमार बेन बंशी
सिगरा के जुए के अड्डे पर DCP नीतू कादयान का शिकंजा, SOG-2 के छापेमारी 47 गिरफ्तार; संचालक राजू रफीक और विजय सोनपापड़ी भी पुलिस की गिरफ्त में DCP क्राइम के नेतृत्व में छापेमारी से जुआ संचालकों में मचा हड़कंप, अब सवाल—इतने बड़े जुए के अड्डे तक स्थानीय पुलिस की नजर क्यों नहीं पहुंची!वाराणसी के सिगरा थाना क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे बड़े जुए के अड्डे जहां रोज करोड़ों के हुए होते हैं उसपर DCP क्राइम के साथ SOG-2 की टीम ने छापेमारी कर बड़ा खुलासा किया है।
कार्रवाई में 47 लोगों को गिरफ्तार किए जाने की बात सामने आई है। मौके से भारी नकदी, कई वाहन और बड़ी संख्या में मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं।इस कार्रवाई में जुए के शातिर संचालन *राजू रफीक और विजय सोनपापड़ी भी पुलिस के हत्थे चढ़े हैं। राजू रफीक को लेकर बताया जाता है कि वह सिगरा थाने का हिस्ट्रीशीटर है और लल्लापुरा इलाके में लंबे समय से लॉटरी के कारोबार से जुड़ा रहा है। जुए के इस अड्डे के संचालन में उसकी भूमिका की भी जांच किए जाने की जरूरत है और साथ ही उसके आका का भी पर्दाफाश होना चाहिए जो पार्स के पीछे से इनका सपोर्ट सिस्टम बना हुआ है।
वहीं रोशन सिंधी को भी मौके से गिरफ्तार किए जाने की बात सामने आई है। अब SOG-2 की इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल *स्थानीय पुलिस की भूमिका और निगरानी व्यवस्था* पर उठ रहा है। यदि इतने बड़े स्तर पर जुए का अड्डा संचालित हो रहा था, तो स्थानीय थाना पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?और अगर पुलिस को इसकी जानकारी थी, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि थाने के बाहर कुछ सफेदपोश लोगों और पत्रकारिता की आड़ में ऐसे अड्डों से जुड़े हुए लोग भी सक्रिय बताए जा रहे बिचौलियों द्वारा गिरफ्तार आरोपियों को छुड़ाने की हर संभव कोशिश की जा रही है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि पूरी कार्रवाई निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़े और किसी भी आरोपी पर कार्रवाई केवल उसके प्रभाव या पहुंच के आधार पर प्रभावित न हो।
खास तौर पर *राजू रफीक और विजय सोनपापड़ी व रोशन सिंधी की गिरफ्तारी* के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि SOG-2 की कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर मामले को कमजोर करने या आरोपियों को राहत दिलाने की कोई कोशिश तो नहीं होती।सवाल सिर्फ 47 गिरफ्तारियों का नहीं है। सवाल यह है कि इतने बड़े जुए के नेटवर्क का असली संचालन कौन कर रहा था, को है जो 1 करोड़ की बुक लेकर बैठ रहा है, पैसा कहां से आ रहा था, किन लोगों तक पहुंच रहा था और स्थानीय स्तर पर इनके मददगार कौन-कौन है?अब गेंद पुलिस के पाले में है। यदि जांच निष्पक्ष हुई तो इस कार्रवाई से जुए के पूरे नेटवर्क और उसके संरक्षण तंत्र की कड़ियां सामने आ सकती हैं।

















