
संवाददाता नवनीत सिंह
भरत मिलाप में सामाजिक संगठनों ने की सेवा चाय पानी और नि:शुल्क चिकित्सा शिविर की रही व्यवस्थासुल्तानपुर अमेठी बाड़ा गल्ला मंडी से जुड़े व्यापारियों और किरायेदारों ने सोमवार को जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह को ज्ञापन सौंपकर मंडी की दुकानों और संबंधित भूमि के मामले में निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की। व्यापारियों ने नगर पालिका परिषद की न्यायालयीय पैरवी, कथित नोटिसों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई न किए जाने और 17 मार्च 2026 के एक पक्षीय आदेश सहित कई बिंदुओं की जांच कराने की मांग उठाई।
ज्ञापन में व्यापारियों ने संबंधित भूमि के नजूल एवं नगर पालिका संपत्ति से जुड़े अभिलेखों, वर्ष 1957-58 के पट्टा संबंधी दस्तावेजों, किराया रजिस्टर, न्यायालयीय पत्रावली और अन्य राजस्व अभिलेखों का मूल दस्तावेजों के आधार पर सत्यापन कराने की मांग की। व्यापारियों का कहना है कि मंडी से अनेक परिवारों की आजीविका जुड़ी है, इसलिए किसी भी कार्रवाई से पहले पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।व्यापारियों ने नगर पालिका अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल सहित संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग भी की।
साथ ही नगर पालिका के नामित अधिवक्ता की भूमिका और कथित हितों के टकराव से जुड़े आरोपों की भी अभिलेखों के आधार पर जांच कराने की मांग ज्ञापन में की गई। व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि जांच से पहले किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा रहा है और आरोपों की सत्यता का निर्धारण जांच के बाद ही किया जाए।ज्ञापन सौंपने के दौरान व्यापारियों ने नगर पालिका और चेयरमैन प्रवीण अग्रवाल के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी जताई। व्यापारियों ने मंडी की दुकानों और अपनी रोजी-रोटी की सुरक्षा की मांग उठाई।इस दौरान जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह ने व्यापारियों को आश्वस्त किया कि उनकी दुकानें खाली नहीं होंगी।
उन्होंने कहा कि पूरे मामले की मॉनिटरिंग वह स्वयं कर रहे हैं और प्रकरण में नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। डीएम के आश्वासन के बाद व्यापारियों ने अपनी मांगों पर उचित कार्रवाई की उम्मीद जताई।ज्ञापन देने वालों में *मनीष साहू , हिमांशु मालवीय* *राहुल, अंकित, प्राशु, सौरभ, शैलेंद्र अग्रहरि, उमाशंकर, शंकर लाल कैलाशी, मुन्ना लाल जायसवाल, संजय अग्रवाल, गुरमीत, मिठे सरदार, जेठू, संजय* सहित अन्य व्यापारी मौजूद रहे।व्यापारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि अभिलेखों और न्यायालयीय रिकॉर्ड के आधार पर वास्तविक स्थिति सामने लाना तथा व्यापारियों की आजीविका और सार्वजनिक संपत्ति के हितों की रक्षा करना है।
















