
रिपोर्टर दीपक शुक्ला
कर्म प्रधान विश्व रचि राखा। जो जस करहिं सो तस फल चाखा॥” की भावना को जीवन का आधार मानते हुए पूर्व जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने अपनी जीवन यात्रा, प्रशासनिक अनुभवों और जनसेवा से जुड़ी स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने अतीत की तस्वीरों के साथ वर्तमान के चित्र साझा करते हुए कहा कि बीते अनुभव वर्तमान को ऊर्जा और भविष्य को नई दिशा देने की प्रेरणा देते हैं।डॉ. दिनेश चंद्र ने कहा, “जीवन में परिस्थितियां और दायित्व बदलते रहते हैं, लेकिन सकारात्मक सोच, कर्म के प्रति निष्ठा और समाज के प्रति संवेदनशीलता हमेशा बनी रहनी चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थी जीवन से प्रशासनिक सेवा तक के सफर को याद करते हुए कहा कि प्रत्येक पड़ाव ने उन्हें कुछ नया सीखने और समाज के लिए बेहतर कार्य करने की प्रेरणा दी।जनसेवा को माना प्रशासनिक दायित्व का मूलपूर्व जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासनिक सेवा में रहते हुए जनहित और विकास कार्यों को सदैव प्राथमिकता दी। उनका प्रयास रहा कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से पात्र लोगों तक पहुंचे।उन्होंने स्पष्ट कहा, “सरकारी योजनाओं में जाति, धर्म या किसी अन्य भेदभाव के बजाय पात्रता को ही आधार बनाया जाना चाहिए।
प्रशासनिक पद अधिकार से अधिक जनता के प्रति जिम्मेदारी और उत्तरदायित्व का पद है।”युवाओं को रोजगार सृजक बनाने पर जोरजौनपुर में अपने कार्यकाल को याद करते हुए डॉ. दिनेश चंद्र ने युवाओं के लिए किए गए प्रयासों को विशेष रूप से उल्लेखनीय बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं के पलायन को रोकने और उन्हें रोजगार तलाशने के बजाय रोजगार सृजित करने के लिए प्रेरित करने की दिशा में कार्य किया गया।उन्होंने ‘सीएम युवा अभियान’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार और रोजगार सृजन से जोड़ने का प्रयास किया गया। उनके अनुसार, जौनपुर ने इस क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया।उन्होंने कहा, “जब कोई युवा बैंक ऋण लेकर अपना रोजगार शुरू करता है!
परिवार को संभालता है और आगे चलकर दूसरों को भी रोजगार देता है, तो उससे मिलने वाली आत्मिक संतुष्टि किसी भी प्रशासनिक उपलब्धि से बड़ी होती है।”बुजुर्गों तक पहुंचा लोककल्याणकारी योजनाओं का लाभडॉ. दिनेश चंद्र ने कहा कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ बुजुर्गों और वरिष्ठ नागरिकों को भी लोककल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना प्राथमिकता रही। उन्होंने कहा कि समाज के युवा और बुजुर्ग दोनों वर्गों के लिए किए गए कार्य आज भी उन्हें आत्मिक संतोष प्रदान करते हैं।तस्वीरों में संजोई जीवन यात्राउन्होंने कहा कि पुरानी तस्वीरें केवल बीते समय की याद नहीं, बल्कि संघर्ष, अनुभव और उपलब्धियों की कहानी भी कहती हैं। अतीत को याद करने का उद्देश्य केवल स्मृतियों को दोहराना नहीं, बल्कि उनसे सीख लेकर वर्तमान को बेहतर बनाना और भविष्य के लिए नए संकल्प लेना है।डॉ. दिनेश चंद्र ने कहा, “पद और दायित्व समय के साथ बदलते हैं, लेकिन जनसेवा की भावना स्थायी रहनी चाहिए। मेरे लिए जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल प्रशासनिक पद पर रहना नहीं, बल्कि अपने दायित्वों के दौरान आमजन के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करना है।”भविष्य के प्रति संकल्प व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि अवसर मिलने पर आगे भी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ समाज एवं राष्ट्र के लिए कार्य करने का प्रयास करेंगे।अंत में प्रभु श्रीराम के प्रति आस्था व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा—“होइहि सोइ जो राम रचि राखा।”उन्होंने कहा कि मनुष्य कर्म और प्रयास कर सकता है, लेकिन अंतिम परिणाम ईश्वर की इच्छा पर निर्भर करता है। इसलिए अतीत से प्रेरणा, वर्तमान में कर्म और भविष्य के लिए संकल्प ही जीवन यात्रा की वास्तविक सार्थकता है।

















