
जौनपुर। श्रीराम कथा केवल धार्मिक प्रसंगों का वर्णन नहीं बल्कि वचन की मर्यादा कर्तव्य त्याग और परिवार के प्रति समर्पण का संदेश देती है। भगवान श्रीराम ने पिता के वचन की रक्षा के लिए राजपाट और राजसी सुखों का त्याग कर 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया। वहीं माता सीता और लक्ष्मण ने भी उनके साथ चलकर त्याग और समर्पण की मिसाल पेश की। यह विचार नौ दिवसीय श्रीराम कथा के छठवें दिन आचार्य शांतनु महाराज ने बीआरपी इंटर कॉलेज परिसर में कथा प्रवचन के दौरान व्यक्त किए।
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं समाजसेवी ज्ञान प्रकाश सिंह के नेतृत्व में आयोजित कथा में आचार्य शांतनु महाराज ने कैकेयी-मंथरा प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि जब अयोध्या में भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियां चल रही थीं तभी मंथरा ने कैकेयी को राजा दशरथ द्वारा दिए गए दो वरदानों की याद दिलाई।मंथरा के बहकावे में आकर कैकेयी कोपभवन में चली गईं और राजा दशरथ से पहला वरदान भरत को अयोध्या का राजा बनाने तथा दूसरा श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास देने का मांगा। कैकेयी की मांग सुनकर राजा दशरथ स्तब्ध रह गए, लेकिन दिए गए वचन की मर्यादा के कारण वे अपने निर्णय से पीछे नहीं हट सके।
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर राहुल गांधी के काफिले की गाड़ियां आपस में टकराईं सुल्तानपुर कोर्ट पहुंचेश्रीराम ने राजसी वैभव का किया त्यागवनवास का आदेश मिलने पर श्रीराम ने बिना किसी विरोध के राजपाट और राजसी सुखों का त्याग कर दिया। माता सीता ने भी पति के साथ वन जाने का दृढ़ निश्चय किया। वहीं लक्ष्मण ने अपने बड़े भाई की सेवा और सुरक्षा के लिए उनके साथ वन जाने का संकल्प लिया।माता कौशल्या को जब श्रीराम के वनवास की जानकारी हुई तो वे भावुक हो उठीं। आचार्य ने मां और पुत्र के इस भावुक प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि श्रीराम ने माता को सांत्वना देते हुए धर्म और पिता के वचन को सर्वोपरि बताया।केवट की भक्ति ने प्रस्तुत की सेवा और समर्पण की मिसालकथा में श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के गंगा तट पर पहुंचने तथा केवट प्रसंग का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया।
श्रीराम ने केवट से गंगा पार कराने का आग्रह किया। केवट ने प्रभु के चरण धोने के बाद ही उन्हें नाव पर बैठाने की विनती की।केवट की भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर श्रीराम ने उसकी बात स्वीकार कर ली। आचार्य ने कहा कि केवट प्रसंग यह संदेश देता है कि भगवान के प्रति सच्ची भक्ति में पद, प्रतिष्ठा और धन नहीं, बल्कि श्रद्धा और समर्पण का महत्व होता है।कथा में पहुंचे जनप्रतिनिधि व गणमान्य लोगकथा श्रवण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के पंचायत राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर, सैयदराजा विधायक सुशील सिंह, पूर्व विधायक जफराबाद डॉ. हरेंद्र देव सिंह, सिरकोनी ब्लॉक प्रमुख वंशराज सिंह, पिंडरा वाराणसी विधायक अवधेश सिंह, टीडी कॉलेज के डॉ. जेपी सिंह, अनुज सिंह गोधना, भुवनेश्वर सिंह, दीपक सिंह, शिवा सिंह, सुनील सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।















