
संवाददाता नवनीत सिंह

सुल्तानपुर की पारंपरिक भट्ठियों से वियतनाम तक पहुंचा ‘अवंतिका’ का स्वाद, अंतरराष्ट्रीय बाजार में महकी अवध की मिठाससुल्तानपुर। जिले की ऐतिहासिक धरती पर पारंपरिक भट्ठियों से तैयार होने वाला ‘अवंतिका’ का पेड़ा अब अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है। कभी स्थानीय बाजार तक सीमित रहने वाला सुल्तानपुर का लाल पेड़ा और हर्बल खजूर पेड़ा अब वियतनाम और सिंगापुर जैसे देशों तक पहुंचने की तैयारी में है।
ग्रेटर नोएडा में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन’ (ओडीओसी) के तहत सुल्तानपुर के अवंतिका समूह ने अपने पारंपरिक उत्पादों का स्टॉल लगाया। यहां विदेशी प्रतिनिधियों और राजनयिकों ने सुल्तानपुर के पेड़ों का स्वाद चखा। खास तौर पर शुगर-फ्री खजूर पेड़े ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

बताया गया कि वियतनाम के राजदूत ने शुगर-फ्री खजूर पेड़े का स्वाद चखने के बाद इसकी सराहना की और इसे वियतनाम में निर्यात करने की इच्छा जताई। इस पहल को सुल्तानपुर के पारंपरिक खाद्य उत्पाद के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
तकनीक से बढ़ेगी पेड़े की शेल्फ लाइफपारंपरिक तरीके से तैयार होने वाले पेड़े की सामान्य शेल्फ लाइफ करीब 7 से 10 दिन होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों को देखते हुए इसे करीब डेढ़ महीने तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बनाए रखने की दिशा में काम किया जा रहा है।इसके लिए लखनऊ, मुंबई और चेन्नई में विशेष तकनीकी प्रशिक्षण की योजना बनाई गई है।

नाइट्रोजन फ्लशिंग और आधुनिक पैकेजिंग तकनीक के जरिए बिना केमिकल के उत्पाद की शेल्फ लाइफ बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।इस पूरी प्रक्रिया में जिला प्रशासन, जिलाधिकारी, उपायुक्त उद्योग नेहा सिंह और खाद्य प्रसंस्करण विभाग के मार्गदर्शन को भी महत्वपूर्ण बताया गया है।तीन पीढ़ियों के संघर्ष की कहानीअवंतिका की सफलता के पीछे तीन पीढ़ियों का संघर्ष और मेहनत जुड़ी है।
बताया जाता है कि यूपी केसरी रहे स्वर्गीय बहरेची पहलवान ने मिट्टी के घड़े में केवड़ा जल और बताशे बेचकर इस कारोबार की नींव रखी थी।बाद में वर्ष 1971 में उज्जैन यात्रा से मिली प्रेरणा के बाद प्रतिष्ठान का नाम ‘अवंतिका’ रखा गया। आज यही पारंपरिक कारोबार अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने की तैयारी कर रहा है।परिवार की बुजुर्ग माता ने इस सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए इसे तीन पीढ़ियों की मेहनत, प्रशासन के सहयोग और नई पीढ़ी के निरंतर प्रयास का परिणाम बताया।

शुद्धता और गुणवत्ता पर खास जोरअवंतिका समूह की ओर से उत्पादों की गुणवत्ता और शुद्धता को सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया गया है। कच्चा माल आने के बाद उसकी गुणवत्ता की जांच की जाती है और खामी मिलने पर पूरी खेप को स्वीकार नहीं किया जाता।केसर पेड़े में असली केसर और लाल पेड़े में पारंपरिक भुनाई की प्रक्रिया अपनाने का दावा किया गया है। उत्पादों में कृत्रिम रंग और अनावश्यक रसायनों से बचने पर जोर दिया जा रहा है।स्थानीय किसानों और कारीगरों को मिलेगा लाभअवंतिका के उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ने से इसका फायदा केवल कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा। दूध उत्पादक किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण स्तर पर जुड़े कारीगरों के लिए भी रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।सुल्तानपुर की एक पारंपरिक भट्ठी से शुरू हुआ यह सफर अब वियतनाम तक पहुंचने की दहलीज पर है। कारोबार से जुड़े लोगों का लक्ष्य आने वाले समय में यूरोप और अमेरिका के बाजारों तक अवध की इस पारंपरिक मिठास को पहुंचाना है।

















